मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,
कैसे गुज़र रही है सब पूछते है, कैसे गुजारता हु कोई नहीं पूछता |
आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
नुक्स निकालते है वो इस कदर हम मे, जैसे उन्हे खुदा चाहिए था और हम इंसान निकले ?
मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,
कैसे गुज़र रही है सब पूछते है, कैसे गुजारता हु कोई नहीं पूछता |
आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
नुक्स निकालते है वो इस कदर हम मे, जैसे उन्हे खुदा चाहिए था और हम इंसान निकले ?