बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना सीख लो मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है. |
आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की
जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....
भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !
उसकी मोहबत पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, दिल करता है के उम्र भर उसका इंतज़ार करू !
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना सीख लो मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है. |
आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की
जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....
भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !
उसकी मोहबत पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, दिल करता है के उम्र भर उसका इंतज़ार करू !