तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !

तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !

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कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे, मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नही आते हो।

"बात इतनी है के तुम बहुत दुर होते जा रहे हो... और हद ये है कि तुम ये मानते भी नही...."

अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।

सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे, मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नही आते हो।

"बात इतनी है के तुम बहुत दुर होते जा रहे हो... और हद ये है कि तुम ये मानते भी नही...."

अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।

सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम