न जख्म भरे...,न शराब सहारा हुई..न वो वापस लौटी... न मोहब्बत दोबारा हुई.....!!
बहुत याद आते हो तुम, दुआ करो मेरी यादाश्ति चली जाये
कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़... ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया...!
उनका बादा भी अजीब था - बोले जिन्दगी भर साथ निभाएंगे, पर पागल हम थे - ये पूछना भूल ही गए के मोहबत के साथ या यादो के साथ !
क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
सब कुछ ठीक ही चल रहा है ना जाने क्यों उदास हु मैं
न जख्म भरे...,न शराब सहारा हुई..न वो वापस लौटी... न मोहब्बत दोबारा हुई.....!!
बहुत याद आते हो तुम, दुआ करो मेरी यादाश्ति चली जाये
कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़... ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया...!
उनका बादा भी अजीब था - बोले जिन्दगी भर साथ निभाएंगे, पर पागल हम थे - ये पूछना भूल ही गए के मोहबत के साथ या यादो के साथ !
क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।
सब कुछ ठीक ही चल रहा है ना जाने क्यों उदास हु मैं