कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम

कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम

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ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!

यकीनन तुम्हें तलाशती हैं मेरी आंखें........ये बात अलग है हम ज़ाहिर नहीं होने देते.....

ऐ दिल तू क्यों रोता है, ये दुनिया है यहाँ ऐसा ही होता है.

बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..

रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।

तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!

ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!

यकीनन तुम्हें तलाशती हैं मेरी आंखें........ये बात अलग है हम ज़ाहिर नहीं होने देते.....

ऐ दिल तू क्यों रोता है, ये दुनिया है यहाँ ऐसा ही होता है.

बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..

रास्ते उसने बदले थे...मंज़िल मेरी बदल गई।

तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!