दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका.. जब तक दिल में जान हैं।
अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं
जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।
चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं
उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं, जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं।
जो लोग दूसरों को आजादी नहीं देते, उन्हें खुद भी इसका हक नहीं होता –
दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका.. जब तक दिल में जान हैं।
अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं
जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।
चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं
उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं, जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं।
जो लोग दूसरों को आजादी नहीं देते, उन्हें खुद भी इसका हक नहीं होता –