आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
याद तो रोज करते है उन्हें, पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. ?
रात नई हैं, यादें पुरानी!
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.
कितने अनमोल होते हैं ये अपनों के रिश्ते कोई याद न करे तो भी इंतज़ार रहता है
आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
याद तो रोज करते है उन्हें, पर उन्होने कभी महसूस ही न किया.. ?
रात नई हैं, यादें पुरानी!
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.
कितने अनमोल होते हैं ये अपनों के रिश्ते कोई याद न करे तो भी इंतज़ार रहता है