तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है,अवतार नहीं गिर,उठ,चल,दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नही

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है,अवतार नहीं गिर,उठ,चल,दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नही

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किसी दूसरे का टाइमपास बनने से अच्छा है अपने करियर पर ध्यान दो |

आप,अपनी चिंताओं का आकार देखकर,अपने ईश्वर के आकार को जान सकते हो, जितनी लम्बी आपकी लिस्ट होगी, उतना छोटा आपका ईश्वर होगा

अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।

किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे

मैं सब जानता हूँ यही सोच इंसान को कुएँ का मेंढक बना देती है।

ज्वाला जगा अन्दर, किस बात से है तंग, दुनिया से नहीं, खुद से है तेरी जंग

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