गुरु का हाथ पकड़ के चलो, लोगों के पैर पकड़ने की नौबत नहीं आएगी
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
जिन्हें आप खुश देखना चाहते हैं उन्हें यही पर सुख देना... क्योकि.. ताजमहल दुनिया ने देखा है मुमताज ने नही..!"
किसी ने एक छोटी भूल की और हम ने वो
ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।
हर बात दिल पे लगाओगे तो रोते रह जाओगे, जो जैसा है उसके साथ वैसा बनना सीखो.
गुरु का हाथ पकड़ के चलो, लोगों के पैर पकड़ने की नौबत नहीं आएगी
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
जिन्हें आप खुश देखना चाहते हैं उन्हें यही पर सुख देना... क्योकि.. ताजमहल दुनिया ने देखा है मुमताज ने नही..!"
किसी ने एक छोटी भूल की और हम ने वो
ज्यादातर लोग उतने ही खुश रहते हैं, जितना वो अपने दिमाग में तय कर लेते हैं।
हर बात दिल पे लगाओगे तो रोते रह जाओगे, जो जैसा है उसके साथ वैसा बनना सीखो.