ज्वाला जगा अन्दर, किस बात से है तंग, दुनिया से नहीं, खुद से है तेरी जंग
चुप रहना कुछ कहने से बेहतर है अगर सामने वाला समझता ही ना हो तुम्हे
इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
जिसे तुम अपना समझ कर खुश हो रहे हो बस यही प्रसनता तुम्हारे दुखो का कारण है..!!
एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।
जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं
ज्वाला जगा अन्दर, किस बात से है तंग, दुनिया से नहीं, खुद से है तेरी जंग
चुप रहना कुछ कहने से बेहतर है अगर सामने वाला समझता ही ना हो तुम्हे
इंसान को अलार्म नही, जिम्मेदारियां जगाती है
जिसे तुम अपना समझ कर खुश हो रहे हो बस यही प्रसनता तुम्हारे दुखो का कारण है..!!
एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।
जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं