अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।
मेरी मोहब्बत की कातिल मेरी ग़रीबी ठहरी उसे ले गए ऊँचे मकाँ वाले....!
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
जब रिश्ते ही दम तोड़ चुके हों.... तो फिर प्यार, इजहार, गलती का अहसास, सही गलत कुछ भी मैटर नहीं करता।
अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।
मेरी मोहब्बत की कातिल मेरी ग़रीबी ठहरी उसे ले गए ऊँचे मकाँ वाले....!
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
जब रिश्ते ही दम तोड़ चुके हों.... तो फिर प्यार, इजहार, गलती का अहसास, सही गलत कुछ भी मैटर नहीं करता।