ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!

ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!

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लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

वो मेरी मोहब्बत है, और मैं सिर्फ उसकी एक आदत !

मोत से पहेले भी ऎक मौत होती हे..! देखो जरा तुम जुदा होकर किसी से..!

मै तब भी अकेला नहीं था, नहीं आज भी हु, तब यारो का काफिला था, आज यादो का कांरवा है

फिर एक दिन ऐसा भी आया जिन्दगी में..की मैंने तेरा नाम सुनकर मुस्कुराना छोड़ दिया।

मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…

लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

वो मेरी मोहब्बत है, और मैं सिर्फ उसकी एक आदत !

मोत से पहेले भी ऎक मौत होती हे..! देखो जरा तुम जुदा होकर किसी से..!

मै तब भी अकेला नहीं था, नहीं आज भी हु, तब यारो का काफिला था, आज यादो का कांरवा है

फिर एक दिन ऐसा भी आया जिन्दगी में..की मैंने तेरा नाम सुनकर मुस्कुराना छोड़ दिया।

मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है…