कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है, बस कोई दिल से नहीं मिलता

कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है, बस कोई दिल से नहीं मिलता

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एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।

मुस्कुराने की अब वजह याद नहीं रहती, पाला है बड़े नाज़ से मेरे गमों ने मुझे!!

बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।

मोत से पहेले भी ऎक मौत होती हे..! देखो जरा तुम जुदा होकर किसी से..!

रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा

काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता

एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।

मुस्कुराने की अब वजह याद नहीं रहती, पाला है बड़े नाज़ से मेरे गमों ने मुझे!!

बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।

मोत से पहेले भी ऎक मौत होती हे..! देखो जरा तुम जुदा होकर किसी से..!

रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा

काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता