बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद, ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे निभाने के बाद !!
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद, ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे निभाने के बाद !!
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।