बेशक गलती भूल जाओ, मगर
मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।
मौन रहना अच्छा है परन्तु अन्याय हो तब नही
ज़िन्दगी को हमेशा मुस्कुरा के गुजारो क्योंकि आप ये नही जानते कि ये कितनी बाकी है
किस्मत करवाती है कटपुतली का खेल जनाब वरना, ज़िन्दगी के रंगमंच पर कोई भी कलाकार कमज़ोर नहीं होता!!
किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जब भी निकलती है तो सभी अंधकारों को मिटा देती है
बेशक गलती भूल जाओ, मगर
मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।
मौन रहना अच्छा है परन्तु अन्याय हो तब नही
ज़िन्दगी को हमेशा मुस्कुरा के गुजारो क्योंकि आप ये नही जानते कि ये कितनी बाकी है
किस्मत करवाती है कटपुतली का खेल जनाब वरना, ज़िन्दगी के रंगमंच पर कोई भी कलाकार कमज़ोर नहीं होता!!
किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जब भी निकलती है तो सभी अंधकारों को मिटा देती है