जिन्हें आप खुश देखना चाहते हैं उन्हें यही पर सुख देना... क्योकि.. ताजमहल दुनिया ने देखा है मुमताज ने नही..!"
ठोकर इसलिए नहीं लगती कि इंसान गिर जाए बल्कि वो तो इसलिए लगती है कि इंसान सुधर जाए .
कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला पर हम डूबने वालो का जज़्बा भी नहीं बदला है शौक-ए-सफ़र ऐसा, कि एक उम्र से हमने मंज़िल भी नहीं पायी और रस्ता भी नहीं बदला
अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है.. देर करने वाले इन्हें खो देते हैं!!
जिन्हें आप खुश देखना चाहते हैं उन्हें यही पर सुख देना... क्योकि.. ताजमहल दुनिया ने देखा है मुमताज ने नही..!"
ठोकर इसलिए नहीं लगती कि इंसान गिर जाए बल्कि वो तो इसलिए लगती है कि इंसान सुधर जाए .
कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला पर हम डूबने वालो का जज़्बा भी नहीं बदला है शौक-ए-सफ़र ऐसा, कि एक उम्र से हमने मंज़िल भी नहीं पायी और रस्ता भी नहीं बदला
अपनी तुलना दुसरो से ना करे, हर फल का स्वाद अलग अलग होता है
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है.. देर करने वाले इन्हें खो देते हैं!!