किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |
सुन बे खजूर वक़्त की बात है आज तेरा है कल मेरा होगा और जब मेरा होगा तोह सोच तेरा क्या होगा
मैं जानता हूं कहां तक उड़ान है उनकी, मेरे ही हाथ से निकले हुए परिंदे है
बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं
फैसले सबके होंगे हुज़ूर, बस ज़रा सही वक्त तो आने दीजिये
गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है
किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |
सुन बे खजूर वक़्त की बात है आज तेरा है कल मेरा होगा और जब मेरा होगा तोह सोच तेरा क्या होगा
मैं जानता हूं कहां तक उड़ान है उनकी, मेरे ही हाथ से निकले हुए परिंदे है
बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं
फैसले सबके होंगे हुज़ूर, बस ज़रा सही वक्त तो आने दीजिये
गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है