जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया
जिन्हे हम ज़हर लगते हे वो हमें खा कर मर जाये
शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला एक बार में सौ को पछड़ना नहीं भूला
जीना है तोह ऐसे जियो की पिता को भी लगे के हा मैंने एक शेर पाला हैं
किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |
जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया
जिन्हे हम ज़हर लगते हे वो हमें खा कर मर जाये
शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला एक बार में सौ को पछड़ना नहीं भूला
जीना है तोह ऐसे जियो की पिता को भी लगे के हा मैंने एक शेर पाला हैं
किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |