हमको तोह सब ही पसंद करते है, अब क्या सबके हो जाए हम
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ, नफरत करुगा तो जिक्र भी नही करुगा
हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है
वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !
हमको तोह सब ही पसंद करते है, अब क्या सबके हो जाए हम
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ, नफरत करुगा तो जिक्र भी नही करुगा
हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है
वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !