बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं.. अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती

बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं.. अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती

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मोहबत है इसलिए जाने दिया …. ज़िद होती तो बाहों में ले लेते।

अपने कमाए हुए पैसों से खरीदो, शौक अपने आप कम हो जायेंगे..!!

डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

मुझे सिंगल जान के तू तारीफ करेगा और मैं पट जाऊँगी? बेटा इतनी भी सीधी नहीं || “चल हट”

क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!

मोहबत है इसलिए जाने दिया …. ज़िद होती तो बाहों में ले लेते।

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डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

मुझे सिंगल जान के तू तारीफ करेगा और मैं पट जाऊँगी? बेटा इतनी भी सीधी नहीं || “चल हट”

क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!