तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना
सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
ये तो सच है क़ि तुम्हे चाहने वाले बहुत होंगे पर मेरी भी ज़िद है कि मुझे सिर्फ तुम चाहो
अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है।
तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना
सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
ये तो सच है क़ि तुम्हे चाहने वाले बहुत होंगे पर मेरी भी ज़िद है कि मुझे सिर्फ तुम चाहो
अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है।