कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे
दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥
कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं तो मुझे बुरा नहीं लगता, क्योंकि वह मुझे उतना ही समझते हैं जितनी उन्हें समझ है
कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे
दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥
कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं तो मुझे बुरा नहीं लगता, क्योंकि वह मुझे उतना ही समझते हैं जितनी उन्हें समझ है