जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ

जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ

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मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..

जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं

मेरे होने का असर तुम पर ..मेरे ना होने के बाद दिखेगा ..!!

पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है

हाँ मै बदल गयी हूँ अब मै जाने वालो को रास्ता देती हूँ वास्ता नहीं!!

तुझे क्या लगता है तेरे जाने से गम होगा, नहीं मेरी जान बस एक कॉन्टैक्ट कम होगा

मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..

जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं

मेरे होने का असर तुम पर ..मेरे ना होने के बाद दिखेगा ..!!

पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है

हाँ मै बदल गयी हूँ अब मै जाने वालो को रास्ता देती हूँ वास्ता नहीं!!

तुझे क्या लगता है तेरे जाने से गम होगा, नहीं मेरी जान बस एक कॉन्टैक्ट कम होगा