खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु

खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु

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खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो

आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके

हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..

तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना

जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ

खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो

आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके

हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..

तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना

जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ