शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
वक़्त आने दो बेटा जवाब भी देंगे हिसाब भी लेंगे और कह के लेंगे
हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है
शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
वक़्त आने दो बेटा जवाब भी देंगे हिसाब भी लेंगे और कह के लेंगे
हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है