ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा
मैं जानता हूं कहां तक उड़ान है उनकी, मेरे ही हाथ से निकले हुए परिंदे है
आज कर लिया खुदसे ये वादा नहीं चाहेंगे किसीको उस्सकी औक़ात सी ज़्यादा.
ऊपर से खामोश अन्दर से तूफ़ान समुन्दर की तरह है तेरे भाई की पहचान
बोलना तो सब जानते हैं पर कब और क्या बोलना है यह बहुत ही कम लोग जानते हैं
तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना
ना पेशी होगी ना गवाह होगा अब जो भी हमसे उलझेगा बस सीधा तबाह होगा
मैं जानता हूं कहां तक उड़ान है उनकी, मेरे ही हाथ से निकले हुए परिंदे है
आज कर लिया खुदसे ये वादा नहीं चाहेंगे किसीको उस्सकी औक़ात सी ज़्यादा.
ऊपर से खामोश अन्दर से तूफ़ान समुन्दर की तरह है तेरे भाई की पहचान
बोलना तो सब जानते हैं पर कब और क्या बोलना है यह बहुत ही कम लोग जानते हैं
तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना