हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

Share:

More Like This

मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!

तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना

ऐटिटूड तो बच्चे दिखाते है हम तो लोगो को उनकी औकात दिखाते है

ज़िद्दी हु गुस्से वाला हु बद्तमीज़ हु बेपरवाह भी हु लेकिन मेने कभी किसी को धोखा नहीं दिया

बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं

मिज़ाज ठंडा रखिए जनाब गर्म तो हमें सिर्फ चाय पसंद है

जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!

तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना

ऐटिटूड तो बच्चे दिखाते है हम तो लोगो को उनकी औकात दिखाते है

ज़िद्दी हु गुस्से वाला हु बद्तमीज़ हु बेपरवाह भी हु लेकिन मेने कभी किसी को धोखा नहीं दिया

बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं