अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं
नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता
खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो
ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो
फर्क है दोस्ती और मोहब्बत में बरसों बाद मिलने पर मोहब्बत नजरें चुरा लेती है और दोस्ती गले लगा लेती हैं
अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं
नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता
खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो
ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो
फर्क है दोस्ती और मोहब्बत में बरसों बाद मिलने पर मोहब्बत नजरें चुरा लेती है और दोस्ती गले लगा लेती हैं