ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
पल पल रंग बदलती है दुनिया और लोग पूछते है होली कब है |
मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है
रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .
समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान
ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
पल पल रंग बदलती है दुनिया और लोग पूछते है होली कब है |
मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है
रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .
समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान