शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

Share:

More Like This

हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें

समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो

मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ

दिमाग कहता है मारा जायेगा लेकिन दिल कहता है देखा जाएगा

कीमत तो दिलो की होती हैं वरना शक्ल तो कुत्तो की भी Cute होती हैं

ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो

हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें

समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो

मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ

दिमाग कहता है मारा जायेगा लेकिन दिल कहता है देखा जाएगा

कीमत तो दिलो की होती हैं वरना शक्ल तो कुत्तो की भी Cute होती हैं

ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो