मुझको फिर वो सुनहरा नज़ारा मिल गया, नज़रों को जो दीदार तुम्हारा मिल गया, और किसी चीज़ की तमन्ना क्यों करूँ, जब मुझे तेरी बाहों में सहारा मिल गया…धन्यवाद
मुझे पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए धन्यवाद मुझे सही-गलत की पहचान सिखाने के लिए धन्यवाद मुझे बड़े सपने देखने और आकाश को चूमने का साहस देने के लिए धन्यवाद मेरा मित्र, गुरु और प्रकाश बनने के लिए धन्यवाद
तुम ही तो थे, जिसने थामा था मेरा हाथ दूर थे जब सभी, तब दिया था मेरा साथ। साथ हैं आज भी, जैसे चांद और रात अंधेरों में भी अब, डरने की क्या बात। आज तहे दिल से, शुक्रिया अदा तुम्हारा करती हूं
जब आप किसी गरीब की मदत करते है तो वह आप के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हैं. धन्यवाद (Thanks) कहने का यह भी एक तरीका है.
मुबारक़ कहें कैसे कैसे कहें शुक्रिया अभी शुरू भी न हो सकी गुफ़्तगू कैसे कहें अलविदा ..
किस तरह से शुक्रिया कहें आपको, जमीन से उठा कर दिल में बिठा लिया, नजरों में समां कर, पलकों पर सजा दिया, इतना प्यार दिया आपने हमको कि मेरे बिखरे शब्दों को कविता बना दिया.–
मुझको फिर वो सुनहरा नज़ारा मिल गया, नज़रों को जो दीदार तुम्हारा मिल गया, और किसी चीज़ की तमन्ना क्यों करूँ, जब मुझे तेरी बाहों में सहारा मिल गया…धन्यवाद
मुझे पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए धन्यवाद मुझे सही-गलत की पहचान सिखाने के लिए धन्यवाद मुझे बड़े सपने देखने और आकाश को चूमने का साहस देने के लिए धन्यवाद मेरा मित्र, गुरु और प्रकाश बनने के लिए धन्यवाद
तुम ही तो थे, जिसने थामा था मेरा हाथ दूर थे जब सभी, तब दिया था मेरा साथ। साथ हैं आज भी, जैसे चांद और रात अंधेरों में भी अब, डरने की क्या बात। आज तहे दिल से, शुक्रिया अदा तुम्हारा करती हूं
जब आप किसी गरीब की मदत करते है तो वह आप के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हैं. धन्यवाद (Thanks) कहने का यह भी एक तरीका है.
मुबारक़ कहें कैसे कैसे कहें शुक्रिया अभी शुरू भी न हो सकी गुफ़्तगू कैसे कहें अलविदा ..
किस तरह से शुक्रिया कहें आपको, जमीन से उठा कर दिल में बिठा लिया, नजरों में समां कर, पलकों पर सजा दिया, इतना प्यार दिया आपने हमको कि मेरे बिखरे शब्दों को कविता बना दिया.–