घर से निकला हुआ हर शख्स आवारा नहीं होता, वो तो उसके हालात उसे भटकने पर मजबूर कर देते है।
Emotions में इतना ज्यादा बह जाना भी ठीक नहीं होता है, कि आप गलत का साथ देने लगें और सच से नजरें चुराने लगें.
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
सफ़ल होने की तमन्ना मुझ में भी है, मगर गलत रास्तों से होकर जाऊं, इतनी भी जल्दी नहीं है.
इन आँखों को जब तेरा दीदार हो जाता है दिन कोई भी हो मेरा त्यौहार हो जाता है.
एक तरफा Emotions हमेशा दुख देते हैं, इसलिए ऐसे emotions को समय रहते नियंत्रित कर लेना चाहिए
घर से निकला हुआ हर शख्स आवारा नहीं होता, वो तो उसके हालात उसे भटकने पर मजबूर कर देते है।
Emotions में इतना ज्यादा बह जाना भी ठीक नहीं होता है, कि आप गलत का साथ देने लगें और सच से नजरें चुराने लगें.
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
सफ़ल होने की तमन्ना मुझ में भी है, मगर गलत रास्तों से होकर जाऊं, इतनी भी जल्दी नहीं है.
इन आँखों को जब तेरा दीदार हो जाता है दिन कोई भी हो मेरा त्यौहार हो जाता है.
एक तरफा Emotions हमेशा दुख देते हैं, इसलिए ऐसे emotions को समय रहते नियंत्रित कर लेना चाहिए