थक कर ही बैठा हूँ, हार कर नहीं… सिर्फ बाजी हाथ से निकली है, जिन्दगी नहीं।
घर से निकला हुआ हर शख्स आवारा नहीं होता, वो तो उसके हालात उसे भटकने पर मजबूर कर देते है।
उसी से पूछ लो उसके इश्क की कीमत, हम तो बस उसके भरोसे पर बिक गए।
इस दिल ने कभी भी किसी का बुरा नहीं चाहा, ये बात और है कि मुझे ये साबित करना नहीं आया।
रिश्ता हमेशा दिल से होना चाहिए शब्दों से नहीं.
इश्क कोई क्यों करता है, इसे जान लेना जरूरी है, इसके बिना कैसे जिए कोई बिन इसके ज़िन्दगी अधूरी है.
थक कर ही बैठा हूँ, हार कर नहीं… सिर्फ बाजी हाथ से निकली है, जिन्दगी नहीं।
घर से निकला हुआ हर शख्स आवारा नहीं होता, वो तो उसके हालात उसे भटकने पर मजबूर कर देते है।
उसी से पूछ लो उसके इश्क की कीमत, हम तो बस उसके भरोसे पर बिक गए।
इस दिल ने कभी भी किसी का बुरा नहीं चाहा, ये बात और है कि मुझे ये साबित करना नहीं आया।
रिश्ता हमेशा दिल से होना चाहिए शब्दों से नहीं.
इश्क कोई क्यों करता है, इसे जान लेना जरूरी है, इसके बिना कैसे जिए कोई बिन इसके ज़िन्दगी अधूरी है.