तमनाओं की महफ़िल तो हर कोई सजाता है मगर पूरी उसकी होती हैं जो तकदीर लेकर आता है
जो लोग अन्दर से मर जाते है, अक्सर वही लोग दूसरो को जीना सिखाते है।
जो व्यक्ति आपकी भावनाओं को नहीं समझता हो, उससे बहुत ज्यादा नजदीकी नहीं बढ़ानी चाहिए.
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
जवाब तो हर बात का देना जानते है हम, लेकिन जो रिश्तो की अहमियत को नहीं समझ पाया, वो शब्दों को क्या समझेंगे।
क्या पता था कि मोहब्बत ही हो जाएगी, हमें तो बस तुम्हारा मुस्कुराना अच्छा लगा था
तमनाओं की महफ़िल तो हर कोई सजाता है मगर पूरी उसकी होती हैं जो तकदीर लेकर आता है
जो लोग अन्दर से मर जाते है, अक्सर वही लोग दूसरो को जीना सिखाते है।
जो व्यक्ति आपकी भावनाओं को नहीं समझता हो, उससे बहुत ज्यादा नजदीकी नहीं बढ़ानी चाहिए.
कसूर किसी का भी हो मगर, आसूँ हमेशा बेक़सूर के ही निकलते हैं
जवाब तो हर बात का देना जानते है हम, लेकिन जो रिश्तो की अहमियत को नहीं समझ पाया, वो शब्दों को क्या समझेंगे।
क्या पता था कि मोहब्बत ही हो जाएगी, हमें तो बस तुम्हारा मुस्कुराना अच्छा लगा था