जिन्हे अपना समझा, वो हमेशा Busy रहे दुसरो के लिए और हमने उनके इंतज़ार में जाने क्या क्या नहीं खोया.

जिन्हे अपना समझा, वो हमेशा Busy रहे दुसरो के लिए और हमने उनके इंतज़ार में जाने क्या क्या नहीं खोया.

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आज इस दौर में, हसीं में छुपी मस्ती कहाँ, और लबो की मुस्कान इतनी सस्ती कहाँ…

इस दौर में हर कोई Busy होने का चोला ओढ़कर बैठा है मानो खुद को इंसान की बस्ती का खुदा समझ बैठा है.

जिसे दूर जाना हो, वो बस Busy होने का बहाना बना देता है तोड़कर किसी का दिल, किसी और से प्यार जताता है

सब दौड़ रहे हैं किसी दौड़ में यहाँ समझ नहीं आ रहा कोई जीतता भी है या सब बस भाग ही रहे हैं।

Busy होने पर भी वो मेरे लिए समय निकाल लेता है वो शख्स सच मैं मुझे खुद से ज्यादा अहमियत देता है.

आराम की ज़िन्दगी पाने में इतना भी क्या व्यस्त हो जाते हैं लोग, की आराम की ज़िन्दगी जीना ही भूल जाते हैं लोग।

आज इस दौर में, हसीं में छुपी मस्ती कहाँ, और लबो की मुस्कान इतनी सस्ती कहाँ…

इस दौर में हर कोई Busy होने का चोला ओढ़कर बैठा है मानो खुद को इंसान की बस्ती का खुदा समझ बैठा है.

जिसे दूर जाना हो, वो बस Busy होने का बहाना बना देता है तोड़कर किसी का दिल, किसी और से प्यार जताता है

सब दौड़ रहे हैं किसी दौड़ में यहाँ समझ नहीं आ रहा कोई जीतता भी है या सब बस भाग ही रहे हैं।

Busy होने पर भी वो मेरे लिए समय निकाल लेता है वो शख्स सच मैं मुझे खुद से ज्यादा अहमियत देता है.

आराम की ज़िन्दगी पाने में इतना भी क्या व्यस्त हो जाते हैं लोग, की आराम की ज़िन्दगी जीना ही भूल जाते हैं लोग।