में थोडा व्यस्त क्या हो गया, प्रेम का सूरज अस्त हो गया …..
हर कोई यहाँ अपनी ज़िन्दगी में व्यस्त है किसी को कोई फ़िक्र नहीं की तुम ज़िंदा हो भी या नहीं।
घोंसला बनाने में हम यूँ मशगूल हो गए, की उड़ने को पंख भी थे..ये भी भूल गए ……
आजकल इतना Busy हर इंसान हो गया और सब कुछ तो पाया, पर सुकून खो गया
बस काम का नाम आना चाहिए लोग वक़्त भी निकालते हैं और झूठी मुस्कराहट भी।
ना रह गई किसी काम की ये ज़िन्दगी इतना व्यस्त कर दिया की सब कुछ पाने के बाद अब आराम ढूंढ रहा हूँ।
में थोडा व्यस्त क्या हो गया, प्रेम का सूरज अस्त हो गया …..
हर कोई यहाँ अपनी ज़िन्दगी में व्यस्त है किसी को कोई फ़िक्र नहीं की तुम ज़िंदा हो भी या नहीं।
घोंसला बनाने में हम यूँ मशगूल हो गए, की उड़ने को पंख भी थे..ये भी भूल गए ……
आजकल इतना Busy हर इंसान हो गया और सब कुछ तो पाया, पर सुकून खो गया
बस काम का नाम आना चाहिए लोग वक़्त भी निकालते हैं और झूठी मुस्कराहट भी।
ना रह गई किसी काम की ये ज़िन्दगी इतना व्यस्त कर दिया की सब कुछ पाने के बाद अब आराम ढूंढ रहा हूँ।