वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !
तेरा घमंड ही तुझे हराएगा मैं क्या हूँ ये तुझे वक़्त बताएगा
सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं
हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है
किस्मत से लड़ने में मजा आ रहा है ना किस्मत मुझे जीतने दे रही है ना मैं हार मान रहा हूँ.
वो दौर ही बीत गया जब सब कुछ लुटा कर हम तुम्हे पाना चाहते थे, अब तुम मुफत में भी मिलो तो भी कबूल नहीं हो !
तेरा घमंड ही तुझे हराएगा मैं क्या हूँ ये तुझे वक़्त बताएगा
सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं
हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है
किस्मत से लड़ने में मजा आ रहा है ना किस्मत मुझे जीतने दे रही है ना मैं हार मान रहा हूँ.