कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है

कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है

Share:

More Like This

मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

किस घुमान मैं हो मोहतरमा भुला दिया हमने तुझे

मुझे मत ढूंढो हजारो मै हम बीका नहीं करते बाजारों मै

मेरी बुराई जरा छुपकर करना तुम्हारे अपने भी मेरे चाहने वाले हैं

रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .

मैं क्या हूँ ये सिर्फ में जानता हूँ बाकी दुनिया तो सिर्फ अंदाज़ा लगा सकती है

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

किस घुमान मैं हो मोहतरमा भुला दिया हमने तुझे

मुझे मत ढूंढो हजारो मै हम बीका नहीं करते बाजारों मै

मेरी बुराई जरा छुपकर करना तुम्हारे अपने भी मेरे चाहने वाले हैं

रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .