सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है
मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ
ख़्वाहिशों का कैदी हूँ, मुझे हकीक़तें सज़ा देती हैं!
सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है
मेरे जीने का तरीक़ा ज़माने से अलग है मैं इशारों पे नहीं ज़िद पर जीता हूँ
ख़्वाहिशों का कैदी हूँ, मुझे हकीक़तें सज़ा देती हैं!