अकेला रहता हूँ नवाब की तरहा छोटे झुण्ड में रह कर कुत्ता बनने की आदत नहीं

अकेला रहता हूँ नवाब की तरहा छोटे झुण्ड में रह कर कुत्ता बनने की आदत नहीं

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लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है

मेरे बारे में इतना मत सोचना , दिल में आता हु , समज में नही

हमारे सामने ज्यादा हीरो बनाने की कोशिश भी मत करना क्योंकि हम तालियों से ज्यादा गालियों से स्वागत करते है

खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी

हम अपनी इस अदा पर थोड़ा गुरूर करते हैं, किसी से प्यार हो या नफरत भरपूर करते हैं

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है

मेरे बारे में इतना मत सोचना , दिल में आता हु , समज में नही

हमारे सामने ज्यादा हीरो बनाने की कोशिश भी मत करना क्योंकि हम तालियों से ज्यादा गालियों से स्वागत करते है

खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी

हम अपनी इस अदा पर थोड़ा गुरूर करते हैं, किसी से प्यार हो या नफरत भरपूर करते हैं