अकेला रहता हूँ नवाब की तरहा छोटे झुण्ड में रह कर कुत्ता बनने की आदत नहीं

अकेला रहता हूँ नवाब की तरहा छोटे झुण्ड में रह कर कुत्ता बनने की आदत नहीं

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जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए

खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी

हम दोनों बराबर जिद्दी रहे हमेशा ना उसने गुस्सा कम किया ना मैंने प्यार

तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.

ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं

वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है

जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए

खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी

हम दोनों बराबर जिद्दी रहे हमेशा ना उसने गुस्सा कम किया ना मैंने प्यार

तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.

ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं

वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है