ऐशो-आराम कमाने में इतने भी व्यस्त मत हो जाना की आपके अपने आपसे ही दूर हो जाए।

ऐशो-आराम कमाने में इतने भी व्यस्त मत हो जाना की आपके अपने आपसे ही दूर हो जाए।

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खबर नहीं थी मुझे तेरे मशगूल होने की और हम बेवजह ही परेशान हो बैठे थे तेरी फ़िक्र में ….

आज इस दौर में, हसीं में छुपी मस्ती कहाँ, और लबो की मुस्कान इतनी सस्ती कहाँ…

हम इतने व्यस्त, मतलबी और बेदिल हो चुके है की, बेवजह किसी से बात करना भी अजीब लगता है….

बस काम का नाम आना चाहिए लोग वक़्त भी निकालते हैं और झूठी मुस्कराहट भी।

सबको अपने से मतलब है इसलिए सब व्यस्त हैं, जिस दिन तुम से होगा सब मिलने आ जाएंगे।

कोई Busy नहीं है आज की तारिख में सच तो ये है की कोई बेवजह मिलना नहीं चाहता।

खबर नहीं थी मुझे तेरे मशगूल होने की और हम बेवजह ही परेशान हो बैठे थे तेरी फ़िक्र में ….

आज इस दौर में, हसीं में छुपी मस्ती कहाँ, और लबो की मुस्कान इतनी सस्ती कहाँ…

हम इतने व्यस्त, मतलबी और बेदिल हो चुके है की, बेवजह किसी से बात करना भी अजीब लगता है….

बस काम का नाम आना चाहिए लोग वक़्त भी निकालते हैं और झूठी मुस्कराहट भी।

सबको अपने से मतलब है इसलिए सब व्यस्त हैं, जिस दिन तुम से होगा सब मिलने आ जाएंगे।

कोई Busy नहीं है आज की तारिख में सच तो ये है की कोई बेवजह मिलना नहीं चाहता।