जिंदगी को भी कशमकश ही बना दिया है हमने, व्यस्त तो जरुर है इसे जीने में, बेखबर इसके मकसद से….
ये वक़्त नहीं खजाना है साहब लोग तब ही निकलते हैं जब उनके फायदे की बात हो।
में थोडा व्यस्त क्या हो गया, प्रेम का सूरज अस्त हो गया …..
हम क्या थोड़ा सा व्यस्त हो गए ये रिश्तों के रास्ते मेरे लिए बंद हो गए।
आराम की ज़िन्दगी पाने में इतना भी क्या व्यस्त हो जाते हैं लोग, की आराम की ज़िन्दगी जीना ही भूल जाते हैं लोग।
ना रह गई किसी काम की ये ज़िन्दगी इतना व्यस्त कर दिया की सब कुछ पाने के बाद अब आराम ढूंढ रहा हूँ।
जिंदगी को भी कशमकश ही बना दिया है हमने, व्यस्त तो जरुर है इसे जीने में, बेखबर इसके मकसद से….
ये वक़्त नहीं खजाना है साहब लोग तब ही निकलते हैं जब उनके फायदे की बात हो।
में थोडा व्यस्त क्या हो गया, प्रेम का सूरज अस्त हो गया …..
हम क्या थोड़ा सा व्यस्त हो गए ये रिश्तों के रास्ते मेरे लिए बंद हो गए।
आराम की ज़िन्दगी पाने में इतना भी क्या व्यस्त हो जाते हैं लोग, की आराम की ज़िन्दगी जीना ही भूल जाते हैं लोग।
ना रह गई किसी काम की ये ज़िन्दगी इतना व्यस्त कर दिया की सब कुछ पाने के बाद अब आराम ढूंढ रहा हूँ।