सबर कर रहा हूं मुसीबत के दिन गुजर जाने दो, आज जो देखकर हंसते हैं कल बस देखते रह जाएंगे
शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है
ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं
काम ऐसा करो की नाम हो जाए या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे
सबर कर रहा हूं मुसीबत के दिन गुजर जाने दो, आज जो देखकर हंसते हैं कल बस देखते रह जाएंगे
शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है
ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं
काम ऐसा करो की नाम हो जाए या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए
आँख से गिरे आसू और नज़रो से गिरे लोग.. कभी नहीं उठा करते..
कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे