डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।
तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो
माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं
मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है
नहीं बदल सकते हम खुदको औरो का हीसाब से, एक हिसाब मुझे भी दिया है, खुदा न अपना हिसाब से ..
शौक नहीं मुझे मोहब्बत का नफरत भरी ज़िन्दगी से खुश हूँ मै
डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।
तुम अपनी अच्छाई में मशहूर रहो, हम बुरे है हमसे दूर रहो
माफ़ी गल्तियों की होती है ..धोखे की नहीं
मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है
नहीं बदल सकते हम खुदको औरो का हीसाब से, एक हिसाब मुझे भी दिया है, खुदा न अपना हिसाब से ..
शौक नहीं मुझे मोहब्बत का नफरत भरी ज़िन्दगी से खुश हूँ मै