तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना

तुम शरीफ मैं कमीना चल अब निकल जा मेरी प्यारी हसीना

Share:

More Like This

दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो , वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं

मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें

समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो

कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है

तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं

मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता

दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो , वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं

मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें

समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो

कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है

तजुर्बे उम्र से नहीं बल्कि हालातों से होते हैं

मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता