हम बाते हालत के हिसाब से करते है
रूठा हुआ है मुझसे इस बात पर ज़माना शामिल नहीं है मेरी फ़ितरत में सर झुकाना…
उस जगह पे हमेशा खामोश रहना जहाँ दो कौड़ी के लोग अपनी हैसियत के गुण गाते हैं
खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु
मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
रूठा हुआ है मुझसे इस बात पर ज़माना शामिल नहीं है मेरी फ़ितरत में सर झुकाना…
उस जगह पे हमेशा खामोश रहना जहाँ दो कौड़ी के लोग अपनी हैसियत के गुण गाते हैं
खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु
मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं