ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
दुनिया क्या सोचेगी ये मै कभी नहीं सोचता
मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता
समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो
खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु
ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
दुनिया क्या सोचेगी ये मै कभी नहीं सोचता
मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता
समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो
खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु