पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है
मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती
दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है
इस संसार में, हर किसी को, अपने "ज्ञान" का "घमंड" हैं…परन्तु किसी को भी अपने …घमंड" का "ज्ञान" नहीं हैं
हमको तोह सब ही पसंद करते है, अब क्या सबके हो जाए हम
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है
मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती
दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है
इस संसार में, हर किसी को, अपने "ज्ञान" का "घमंड" हैं…परन्तु किसी को भी अपने …घमंड" का "ज्ञान" नहीं हैं
हमको तोह सब ही पसंद करते है, अब क्या सबके हो जाए हम
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई