खौफ तो आवारा कुत्ते भी मचाते है पर दहशत हमेशा शेर की ही रहती है
जो गया उसे जाने दो प्यार ही तो था कहीं और से आने दो
में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा
किस घुमान मैं हो मोहतरमा भुला दिया हमने तुझे
हमारी खामोशी को हमारा घमंड ना समझो बस कुछ ठोकरे ऐसी लगी है कि बोलने को मन नहीं करता.
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
खौफ तो आवारा कुत्ते भी मचाते है पर दहशत हमेशा शेर की ही रहती है
जो गया उसे जाने दो प्यार ही तो था कहीं और से आने दो
में चुप हूँ कुछ वजह है जिस दिन बरस जाऊंगा उस दिन तरस भी नहीं खाऊंगा
किस घुमान मैं हो मोहतरमा भुला दिया हमने तुझे
हमारी खामोशी को हमारा घमंड ना समझो बस कुछ ठोकरे ऐसी लगी है कि बोलने को मन नहीं करता.
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.