हम बाते हालत के हिसाब से करते है

हम बाते हालत के हिसाब से करते है

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बाप के सामने अय्याशी… और हमारे सामने बदमाशी.. बेटा, भूल कर भी मत करियो..

वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है

औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया

दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है

रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .

ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो

बाप के सामने अय्याशी… और हमारे सामने बदमाशी.. बेटा, भूल कर भी मत करियो..

वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है

औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया

दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है

रब देकर भी आजमाता है और ले कर भी .

ऐसी वैसी बात पर धयान मत दो बाप है तुम्हारे हमे ज्ञान मत दो