माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।
वो समंदर ही क्या जिसका कोई किनारा न हो, वो इबादत ही क्या जिसमे महाकाल नाम तेरा न हो,
महाकाल के भक्तों से पंगा, और भरी महेफिल में दंगा मत करना वर्ना करूँगा चौराहे पे नंगा और भेजूँगा तेरी अस्थियों को गंगा । ?Jai Shree Mahakal?
लोग पूछते हैं – “कौन-सी दुनिया में जीते हो ?” हमने भी कह दिया – “महाकाल कि भक्ति में दुनिया कहा नज़र आती है ?”
जहां बरस रहा है मेरे महाकाल का प्यार वो दरबार भी किसी जन्नत से कम नही..!! हर-हर महादेव शिवशंकर
करूँ क्यों फ़िक्र कि मौत के बाद जगह कहाँ मिलेगी जहाँ होगी मेरे महादेव की महफिल मेरी रूह वहाँ मिलेगी.
माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।
वो समंदर ही क्या जिसका कोई किनारा न हो, वो इबादत ही क्या जिसमे महाकाल नाम तेरा न हो,
महाकाल के भक्तों से पंगा, और भरी महेफिल में दंगा मत करना वर्ना करूँगा चौराहे पे नंगा और भेजूँगा तेरी अस्थियों को गंगा । ?Jai Shree Mahakal?
लोग पूछते हैं – “कौन-सी दुनिया में जीते हो ?” हमने भी कह दिया – “महाकाल कि भक्ति में दुनिया कहा नज़र आती है ?”
जहां बरस रहा है मेरे महाकाल का प्यार वो दरबार भी किसी जन्नत से कम नही..!! हर-हर महादेव शिवशंकर
करूँ क्यों फ़िक्र कि मौत के बाद जगह कहाँ मिलेगी जहाँ होगी मेरे महादेव की महफिल मेरी रूह वहाँ मिलेगी.