जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

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महाकाल कि महेफील में बैठा किजिए साहब । बादशाहत का अंदाज़ खुद ब खुद आ जायेगा।। जय श्री महाकाल

माथे का? तिलक कभी ?हटेगा नही, और जब तक जिन्दा हूँ,? तब तक महाकाल ⚡का नाम मुँह से मिटेगा नही।

हमें ढूंढना ?इतना मुश्किल नहीं है मेरे ?दोस्त, बस जिस महेफिल में महाकाल? की आवाज गूंज रही हो वहा चले आना।

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।

बदन मेरा मिट्टी का……… साँसे मेरी उधार है…… घमंड करो तो किस बात का! हम सब उसके ही तो किराएदार है!! ??हर हर महादेव??

हैसियत मेरी छोटी है पर, मन मेरा शिवाला है । करम तो मैं करता जाऊँ, क्योंकि साथ मेरे डमरूवाला है ।

महाकाल कि महेफील में बैठा किजिए साहब । बादशाहत का अंदाज़ खुद ब खुद आ जायेगा।। जय श्री महाकाल

माथे का? तिलक कभी ?हटेगा नही, और जब तक जिन्दा हूँ,? तब तक महाकाल ⚡का नाम मुँह से मिटेगा नही।

हमें ढूंढना ?इतना मुश्किल नहीं है मेरे ?दोस्त, बस जिस महेफिल में महाकाल? की आवाज गूंज रही हो वहा चले आना।

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।

बदन मेरा मिट्टी का……… साँसे मेरी उधार है…… घमंड करो तो किस बात का! हम सब उसके ही तो किराएदार है!! ??हर हर महादेव??

हैसियत मेरी छोटी है पर, मन मेरा शिवाला है । करम तो मैं करता जाऊँ, क्योंकि साथ मेरे डमरूवाला है ।