क्या करूँगा मैं अमीर बन कर, मेरा महाकाल तो फकीरो का दीवाना है..!
गरज उठे गगन सारा, समंदर छोड़े अपना किनारा , हिल जाये जहान सारा, जब गूंजे महाकाल का नारा ।।।
ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।
माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।
छल में बेशक बल है लेकिन मेरे महाकाल के पास सबका हल है
तेरी चौखट पे सर रख दिया हैं, भार मेरा उठाना पड़ेगा। मैं भला हूँ बुरा हूँ मेरे महाकाल मुझको अपना बनाना पड़ेगा।
क्या करूँगा मैं अमीर बन कर, मेरा महाकाल तो फकीरो का दीवाना है..!
गरज उठे गगन सारा, समंदर छोड़े अपना किनारा , हिल जाये जहान सारा, जब गूंजे महाकाल का नारा ।।।
ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।
माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।
छल में बेशक बल है लेकिन मेरे महाकाल के पास सबका हल है
तेरी चौखट पे सर रख दिया हैं, भार मेरा उठाना पड़ेगा। मैं भला हूँ बुरा हूँ मेरे महाकाल मुझको अपना बनाना पड़ेगा।