जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

Share:

More Like This

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।

आग लगे उस जवानी कों ज़िसमे महाकाल नाम की दिवानगी न हो जय महाकाल

इश्क में पागल छोरे छोरियाँ, वेलेन्टाईन डे के गुलाब बिन रहे है, हम तो बाबा महाकाल के दिवाने है, शिवरात्री के दिन गिन रहै है ।

माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।

वो समंदर ही क्या जिसका कोई किनारा न हो, वो इबादत ही क्या जिसमे महाकाल नाम तेरा न हो,

हम महाकाल नाम की शमा के छोटे से परवाने है, कहने वाले कुछ भी कहे हम तो महाकाल के दिवाने है..!

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।

आग लगे उस जवानी कों ज़िसमे महाकाल नाम की दिवानगी न हो जय महाकाल

इश्क में पागल छोरे छोरियाँ, वेलेन्टाईन डे के गुलाब बिन रहे है, हम तो बाबा महाकाल के दिवाने है, शिवरात्री के दिन गिन रहै है ।

माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।

वो समंदर ही क्या जिसका कोई किनारा न हो, वो इबादत ही क्या जिसमे महाकाल नाम तेरा न हो,

हम महाकाल नाम की शमा के छोटे से परवाने है, कहने वाले कुछ भी कहे हम तो महाकाल के दिवाने है..!