जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

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फिदा हो जाऊँ तेरी किस-किस अदा पर शंभू, अदाये लाख तेरी, और बेताब दिल एक मेरा है । ?Jai Shiv Shambhu?

दिखावे की मोहब्बत से दूर रहता हूँ, इसलिये मैं महाकाल के नशे में चूर रहता हूँ ।

यह कलयुग है यहाँ ताज अच्छाई को नही बुराई को मिलता है, लेकिन हम तो बाबा महाकाल के दीवाने है , ताज के नही रुद्राक्ष के दीवाने है.

वो समंदर ही क्या जिसका कोई किनारा न हो, वो इबादत ही क्या जिसमे महाकाल नाम तेरा न हो,

कबूल मेरी भी विनती होनी चाहिये तुझे चाहने वाले पागलो में हमारी भी गिनती होनी चाहिये, ?Jai Mahakal?

हे मेरे भोलेनाथ सुख देना तो बस इतना देना कि मन में अहंकार न आ जाये और दु:ख देना तो बस इतना देना कि आस्था न चली जाये.

फिदा हो जाऊँ तेरी किस-किस अदा पर शंभू, अदाये लाख तेरी, और बेताब दिल एक मेरा है । ?Jai Shiv Shambhu?

दिखावे की मोहब्बत से दूर रहता हूँ, इसलिये मैं महाकाल के नशे में चूर रहता हूँ ।

यह कलयुग है यहाँ ताज अच्छाई को नही बुराई को मिलता है, लेकिन हम तो बाबा महाकाल के दीवाने है , ताज के नही रुद्राक्ष के दीवाने है.

वो समंदर ही क्या जिसका कोई किनारा न हो, वो इबादत ही क्या जिसमे महाकाल नाम तेरा न हो,

कबूल मेरी भी विनती होनी चाहिये तुझे चाहने वाले पागलो में हमारी भी गिनती होनी चाहिये, ?Jai Mahakal?

हे मेरे भोलेनाथ सुख देना तो बस इतना देना कि मन में अहंकार न आ जाये और दु:ख देना तो बस इतना देना कि आस्था न चली जाये.