जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

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शिव सत्य है, शिव अनंत है, शिव अनादि है, शिव भगवंत है, शिव ओंकार है, शिव ब्रह्म है, शिव शक्ति है, शिव भक्ति है

हम दुनिया? से अलग नहीं, हमारी? दुनिया ही अलग है !! ? जय श्री महाकाल

राम उसका रावण भी उसका, जीवन उसका मरण भी उसका, ताण्डव है और ध्यान भी वो है, अज्ञानी का ज्ञान भी वो है ।

मैं और मेरा भोलेनाथ दोनो ही बड़े भुलक्कड़ है, वो मेरी गलतियाँ भूल जाते है, और मैं उनकी महेरबानियाँ… ?Mahadev?

लोग पूछते हैं – “कौन-सी दुनिया में जीते हो ?” हमने भी कह दिया – “महाकाल कि भक्ति में दुनिया कहा नज़र आती है ?”

किसी दिन जान लेके छोड़ेगी, ये तेरी यादे ओर हिचकियां महादेव।

शिव सत्य है, शिव अनंत है, शिव अनादि है, शिव भगवंत है, शिव ओंकार है, शिव ब्रह्म है, शिव शक्ति है, शिव भक्ति है

हम दुनिया? से अलग नहीं, हमारी? दुनिया ही अलग है !! ? जय श्री महाकाल

राम उसका रावण भी उसका, जीवन उसका मरण भी उसका, ताण्डव है और ध्यान भी वो है, अज्ञानी का ज्ञान भी वो है ।

मैं और मेरा भोलेनाथ दोनो ही बड़े भुलक्कड़ है, वो मेरी गलतियाँ भूल जाते है, और मैं उनकी महेरबानियाँ… ?Mahadev?

लोग पूछते हैं – “कौन-सी दुनिया में जीते हो ?” हमने भी कह दिया – “महाकाल कि भक्ति में दुनिया कहा नज़र आती है ?”

किसी दिन जान लेके छोड़ेगी, ये तेरी यादे ओर हिचकियां महादेव।