जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

जिनके रोम-रोम में शिव हैं वही विष पिया करते हैं , जमाना उन्हें क्या जलाएगा , जो श्रृंगार ही अंगार से किया करते हैं.

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ये कैसी घटा छाई है, हवा में नई सुर्खी आई है । फैली है जो सुगंध हवा में । जरूर महादेव ने चिलम जलाई है ।

तेरी जटाओं का एक छोटा सा बाल हूँ, तेरे होने से मैं बेमिसाल हूँ, तेरे होते मुझे कोई छू भी ना पाये, क्योंकि मेरे #महाकाल# मैं तेरा लाल हूँ ।

मिलावट है भोलेनाथ तेरे इश्क में इत्र और नशे की तभी तो मैं थोड़ा महका हुआ और थोड़ा बहका हुआ हूँ ।

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।

किसी दिन जान लेके छोड़ेगी, ये तेरी यादे ओर हिचकियां महादेव।

हम दुनिया? से अलग नहीं, हमारी? दुनिया ही अलग है !! ? जय श्री महाकाल

ये कैसी घटा छाई है, हवा में नई सुर्खी आई है । फैली है जो सुगंध हवा में । जरूर महादेव ने चिलम जलाई है ।

तेरी जटाओं का एक छोटा सा बाल हूँ, तेरे होने से मैं बेमिसाल हूँ, तेरे होते मुझे कोई छू भी ना पाये, क्योंकि मेरे #महाकाल# मैं तेरा लाल हूँ ।

मिलावट है भोलेनाथ तेरे इश्क में इत्र और नशे की तभी तो मैं थोड़ा महका हुआ और थोड़ा बहका हुआ हूँ ।

ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।

किसी दिन जान लेके छोड़ेगी, ये तेरी यादे ओर हिचकियां महादेव।

हम दुनिया? से अलग नहीं, हमारी? दुनिया ही अलग है !! ? जय श्री महाकाल