दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।
लोगों का उसूल है जबतक पैसा है तब तक रिश्ता है।
कलयुग का दर्शन करना चाहते हो तो एक मतलबी दोस्त बनाकर देखो, कलयुग का दर्शन उसके अंदर ही हो जाएगा।
यह दुनिया मतलबी लोगों से भरी हुई है, किसी पर भी भरोसा मत कीजिए।
देख के दुनिया अब हम भी बदलेंगे मिजाज़ रिश्ता सब से होगा लेकिन वास्ता किसी से नहीं
हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।
दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।
लोगों का उसूल है जबतक पैसा है तब तक रिश्ता है।
कलयुग का दर्शन करना चाहते हो तो एक मतलबी दोस्त बनाकर देखो, कलयुग का दर्शन उसके अंदर ही हो जाएगा।
यह दुनिया मतलबी लोगों से भरी हुई है, किसी पर भी भरोसा मत कीजिए।
देख के दुनिया अब हम भी बदलेंगे मिजाज़ रिश्ता सब से होगा लेकिन वास्ता किसी से नहीं
हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।