जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।
सच्चे लोगों के साथ सच्ची बात करे, और मतलबी लोगों के साथ सिर्फ मतलब की बात करे।
मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे, जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे
हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।
लोगों का उसूल है जबतक पैसा है तब तक रिश्ता है।
मसला यह भी है इस ज़ालिम दुनिया का .. कोई अगर अच्छा भी है तो वो अच्छा क्यॅ है..
जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।
सच्चे लोगों के साथ सच्ची बात करे, और मतलबी लोगों के साथ सिर्फ मतलब की बात करे।
मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे, जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे
हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।
लोगों का उसूल है जबतक पैसा है तब तक रिश्ता है।
मसला यह भी है इस ज़ालिम दुनिया का .. कोई अगर अच्छा भी है तो वो अच्छा क्यॅ है..