न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम
पलटकर जवाब देना गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदे भूल जाते है।
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
अहंकार में तीनों गए धन, वैभव और वंश यकीन न आये तो देख लो रावण कौरव और कंस
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम
पलटकर जवाब देना गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदे भूल जाते है।
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
अहंकार में तीनों गए धन, वैभव और वंश यकीन न आये तो देख लो रावण कौरव और कंस
फर्क तोह अपनी अपनी सोच मै है जनाब वरना दोस्ती भी मोहब्बत सेह कम नहीं होती
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं