बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
धोखा देने के लिए शुक्रिया तुम ना मिलते तो दुनिया समझ में ना आती
समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान
लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं
बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
धोखा देने के लिए शुक्रिया तुम ना मिलते तो दुनिया समझ में ना आती
समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान
लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं