गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता
अपने कमाए हुए पैसों से खरीदो, शौक अपने आप कम हो जायेंगे..!!
हम अपनी इस अदा पर थोड़ा गुरूर करते हैं, किसी से प्यार हो या नफरत भरपूर करते हैं
लोग केहते है की मेरे दोस्त कम है लेकीन, वोह नही जानते की मेरे दोस्तो मे कीतना "दम" हैं
गुस्से के तेज़ लोग दिल के साफ़ होते हैं
खौफ तो आवारा कुत्ते भी मचाते है पर दहशत हमेशा शेर की ही रहती है
गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता
अपने कमाए हुए पैसों से खरीदो, शौक अपने आप कम हो जायेंगे..!!
हम अपनी इस अदा पर थोड़ा गुरूर करते हैं, किसी से प्यार हो या नफरत भरपूर करते हैं
लोग केहते है की मेरे दोस्त कम है लेकीन, वोह नही जानते की मेरे दोस्तो मे कीतना "दम" हैं
गुस्से के तेज़ लोग दिल के साफ़ होते हैं
खौफ तो आवारा कुत्ते भी मचाते है पर दहशत हमेशा शेर की ही रहती है