मोहबत है इसलिए जाने दिया …. ज़िद होती तो बाहों में ले लेते।
समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!
जो मेरा होता है उस पर किसी का हक़ तो क्या नज़र तक बर्दाश्त नहीं करती मै
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..
मोहबत है इसलिए जाने दिया …. ज़िद होती तो बाहों में ले लेते।
समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!
जो मेरा होता है उस पर किसी का हक़ तो क्या नज़र तक बर्दाश्त नहीं करती मै
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है
आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..