मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती
मुझे सिंगल जान के तू तारीफ करेगा और मैं पट जाऊँगी? बेटा इतनी भी सीधी नहीं || “चल हट”
किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं
दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए
मैं अपनी अकड़ का दिवाना हु मोहब्बत मेरे पल्ले नहीं पड़ती
मुझे सिंगल जान के तू तारीफ करेगा और मैं पट जाऊँगी? बेटा इतनी भी सीधी नहीं || “चल हट”
किनारा न मिले तो कोई बात नहीं दुसरो को डुबाके मुझे तैरना नहीं है |
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
सबर कर अपना किस्सा नहीं कहानी हैं
दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही मज़ेदार है बस निभाने का दम होना चाहिए