लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

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जीना है तोह ऐसे जियो की पिता को भी लगे के हा मैंने एक शेर पाला हैं

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

हमारे सामने ज्यादा हीरो बनाने की कोशिश भी मत करना क्योंकि हम तालियों से ज्यादा गालियों से स्वागत करते है

आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..

रिश्तो को वक़्त और हालत बदल देते है अब तेरा ज़िकर होने पर हम बात बदल देते है

हम बाते हालत के हिसाब से करते है

जीना है तोह ऐसे जियो की पिता को भी लगे के हा मैंने एक शेर पाला हैं

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

हमारे सामने ज्यादा हीरो बनाने की कोशिश भी मत करना क्योंकि हम तालियों से ज्यादा गालियों से स्वागत करते है

आग लगाने वालो को कहाँ खबर , रुख हवाओ ने बदला तो खाक वो भी होंगे ..

रिश्तो को वक़्त और हालत बदल देते है अब तेरा ज़िकर होने पर हम बात बदल देते है

हम बाते हालत के हिसाब से करते है