लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

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ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा है, हम वह है जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं

अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!

ना मीठे हैं और न बनने की कोशिश करते हैं, हम तो वो सच हैं जो सबको कड़वे लगते हैं...

मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..

हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है

दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है

ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा है, हम वह है जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं

अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!

ना मीठे हैं और न बनने की कोशिश करते हैं, हम तो वो सच हैं जो सबको कड़वे लगते हैं...

मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..

हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है

दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है