सुनो किसी के पास तमीज का नंबर है सब कहते हैं तमीज से बात करो
जलना जलाना यह सब फ़ुज़ूल है, अपने काम में मस्त रहना यह अपना उसूल है
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें
डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।
सुनो किसी के पास तमीज का नंबर है सब कहते हैं तमीज से बात करो
जलना जलाना यह सब फ़ुज़ूल है, अपने काम में मस्त रहना यह अपना उसूल है
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
ताकत अपने लफ्जों में डालो आवाज़ में नहीं क्योंकि फसलें बारिश से उगती है बाड़ से नहीं
मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें
डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।