तुम्हारी अकड़ में कुछ इस तरह से तोडूंगा सच कहता हूँ कहीं का नही छोडूंगा
बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं
हमको तोह सब ही पसंद करते है, अब क्या सबके हो जाए हम
सीने में जिगर रखना पड़ता है छोटे हाथ में घोडा रखने से हर कोई बस्ती का रघु नहीं बन जाता
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
साथ चलता है मेरे दुआओ का काफिला, किस्मत से कह दो अकेला नही हुँ मै ||
तुम्हारी अकड़ में कुछ इस तरह से तोडूंगा सच कहता हूँ कहीं का नही छोडूंगा
बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं
हमको तोह सब ही पसंद करते है, अब क्या सबके हो जाए हम
सीने में जिगर रखना पड़ता है छोटे हाथ में घोडा रखने से हर कोई बस्ती का रघु नहीं बन जाता
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
साथ चलता है मेरे दुआओ का काफिला, किस्मत से कह दो अकेला नही हुँ मै ||