शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है
आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके
जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
शेर की सवारी और शैख़ की यारी नसीब वालो को मिलती है
कौन कब किसका और कितना अपना है ..यह सिर्फ वक़्त बताता है
झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है
आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके
जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये