बोलना तो सब जानते हैं पर कब और क्या बोलना है यह बहुत ही कम लोग जानते हैं

बोलना तो सब जानते हैं पर कब और क्या बोलना है यह बहुत ही कम लोग जानते हैं

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हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!

जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।

हमसे उलझने से पहले हमारा इतिहास जान लो सीधा चेहरा इतिहास गहरा

फैसले सबके होंगे हुज़ूर, बस ज़रा सही वक्त तो आने दीजिये

परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो हिसाब सबका होगा कोई कितना भी बड़ा नवाब हो

हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!

जिन्हे अपना समझा वो पीठ पीछे खंजर खोप रहे है बिचारे कुत्ते शेर के आगे भोंक रहे है

डंके की चोट पर सच कहती हूं, हिम्मत मेरी रगों में है।

हमसे उलझने से पहले हमारा इतिहास जान लो सीधा चेहरा इतिहास गहरा

फैसले सबके होंगे हुज़ूर, बस ज़रा सही वक्त तो आने दीजिये

परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो हिसाब सबका होगा कोई कितना भी बड़ा नवाब हो