अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना
अपने कमाए हुए पैसों से खरीदो, शौक अपने आप कम हो जायेंगे..!!
अच्छी किताबे,और अच्छे लोग..! तुरंत समझ में नहीं आते, उन्हें पढ़ना पड़ता है..
औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया
समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!
जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं
अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना
अपने कमाए हुए पैसों से खरीदो, शौक अपने आप कम हो जायेंगे..!!
अच्छी किताबे,और अच्छे लोग..! तुरंत समझ में नहीं आते, उन्हें पढ़ना पड़ता है..
औरो के लिए जीते थे तो किसी को शिकायत न थी, थोड़ा सा अपने लिए क्या सोचा ज़माना दुश्मन बन गया
समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!
जो सुधर जाये वह हम नहीं और हमे कोई सुधार दे इतना किसी में दम नहीं